प्यार और व्यस्तता के बीच

 मेरा प्यार कभी नहीं जानता "व्यस्त" का अर्थ,

जब दिल से चाहूं, तो समय को भी मोड़ देता हूँ,

अपनी हर सुबह, हर शाम, अपनी पूरी जिंदगी,

उसके लिए फिर से रचता हूँ, प्यार की ऊँची मंजिल।  


अगर कहूँ "मैं व्यस्त हूँ,"

तो कभी इसका मतलब नहीं तुम्हारे साथ दूर होना,

यह कभी बहाना नहीं, ना ही कोई झूठ,

जब प्यार अंदर होता है,

मैं रात की रौशनी में भी जागता हूँ, बस तुम्हारे लिए।  


मैंने सुना है, "बहुत व्यस्त हूँ" का झूठ,

उस दर्द को पी गया, इंतजार की लंबी रेखाओं में,

लेकिन अब मैं देखता हूँ इसे साफ-साफ-

यह कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक चुनाव है,

कोई काम का बोझ नहीं, बल्कि नियति है।  


मैं कोई "व्यस्त" प्रेमी नहीं हूँ,

मैं हूँ वह जो हर पल मौजूद है,

जो हर आवाज़ पर, हर मौके पर,

तुम्हारे पास आने को तैयार है।

मेरा प्यार मेज़पर जगह बनाये रखता है,

चाहे कमरा कितना भी भरा हो,  


तो जब कोई कहे "व्यस्त,"

मैं सुनता हूँ उनके शब्दों के पीछे की सच्चाई-

"मैंने तुम्हारे ऊपर कोई और चुन लिया,"

यही तो वो संकेत है,

जो मुझे बताता है कि मुझे फिर से खुद से प्यार करना है,

उसे उसी तरह प्यार देना, जैसे मैं हकदार हूँ-

बिना "व्यस्त" के, बस आग के साथ,

जो जलाती है, जो रोशन करती है,

और सब कुछ बदल देती है।

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