विरासत की आहट


सिर्फ सोना, चांदी या ज़मीन नहीं होती विरासत,

यह है वो नज़ाकत, जो छुपी होती दिल की बात।

मौन में छिपा एक सुकून, एक दबा हुआ दर्द,

प्यार की वो मूरत, जो बिन बोले करती है फ़रमर्द।


कभी देखी वो अधूरी कहानियाँ,

जो बयां न हो सकीं ज़ुबान की दास्ताँ।

उनके अरमाँ, उनके आँसू, उनकी मुस्कान,

हमारे जीने की जड़ें, हमारा पहचान।


पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा ये सिलसिला,

जहाँ छुपा था संघर्ष, था प्यार का मेला।

उनकी हंसी, उनके ग़म हमारे सीने में बस गए,

उनकी जीत, उनकी हार हमारे खून में घुल गए।


कुछ विरासतें होतीं होतीं मुलायम छूआ,

तो कुछ होतीं खंजर की तरह गहरे छूआ।

गर्व और शर्म दोनों के रंग लिए,

कभी मिठास, कभी कटुता लिए।


नाम और कहानी जो हमें मिली,

उन फैसलों की छाया जो हम झेले।

कुछ विरासतें जख्म देती हैं दिल पर,

फिर भी बनाती हैं हमारी आत्मा को सशक्त, कल पर।


माँ की दुआ, पिता की चुप्पी,

वो कड़वाहट और वो मिठास की रूपी।

हर विरासत में एक रहस्य छुपा है,

कुछ दर्द का, कुछ प्रेम का साया है।


टूटे सपनों से हम नए रास्ते बनाएं,

पुराने जख्मों को सहारा दें, नए फूल खिलाएं।

जो सही हो उसे अपनाएं, जो गलत हो उसे छोड़ दें,

नई उम्मीदों के साथ हम अपनी राह जोड़े।


राख से उठेगा एक नया उजाला,

जो हम बनाएं, वही होगा हमारा मेला।

विरासत सिर्फ बीता हुआ नहीं,

यह है आज और कल का पक्का बीड़ा।


तो चलिए हम सलाम करें उस कहानी को,

जो हमें बनाती है वही हमारी रवानी को।

जो हमने लिया और जो हमने बदला,

वो ही है असली धरोहर, हमारा खजाना।


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