सपनों का संसार

 


मौन आशाओं में हम रहते हैं,

ख्वाबों की जादूगरी में खोए हैं,

"मैं तो स्वप्न देख रहा हूँ," कहते हैं,

पर दिल में उम्मीद की किरण जगे हैं।  


सपनों का संसार बुनते हैं हम,

चाँद और सूरज के नीचे संग,

"आशा है कि एक दिन तुम भी आएंगे,"

प्रेम का संदेश हर दिल में समाएंगे।  


अंधकार को हम मिटाएंगे,

सपनों का ये संसार बनाएंगे,

जहाँ न कोई सीमा हो, न दीवारें,

सिर्फ़ प्यार की वह मुस्कान प्यारी।  


जहाँ हर आवाज़ को माना जाए,

भय और द्वेष को छोड़ दिया जाए,

आओ मिलकर ये सपना सजाएँ,

प्रेम और शांति का गीत गाएँ।  


आशा का दीप जलाएँ हम,

सभी को एक साथ लाएँ हम,

विश्व जब एक हो जाएगा,

प्रेम का संसार खुशियों से भर जाएगा।

Comments

Popular posts from this blog

एक परछाई सी चलती है मेरे साथ

पवित्रता की परछाईं

ज़ंजीरों का विनाश: मानवता का आह्वान

एक ही आकाश तले

आशय की सांसें

आत्मा का सफ़र

विरासत की आहट

वह अनसुना नायक

लालफ़ीतों का साम्राज्य

दो बहनों की कथा: यमुना, यामिनी और मृत्यु का संदेश