भारत भूमि
मौन फुसफुसाहटों से उठे ध्वनि,
गहरे सत्य की अथक गूँज।
माँ धरती, करुणा की मूरत,
असीम करुणा का सागर, अनंत वज़ूद।
मनुष्यों की आकांक्षा पूर्ण,
वह वरदायिनी, प्रकाशमय।
ईश्वरों का अवतार, ज्योति का स्रोत,
अंधकार में दीपक सा जलता।
यहाँ ज्ञान की गंगा बहती,
यहाँ धर्म की नींव टिकी,
कला और विज्ञान का जन्म हुआ,
यहाँ हर साँस में जीवन पलता।
चौदह लोकों में शोभायमान,
वेदों ने उसकी महिमा गाय।
सपनों सा विलक्षण यह धरा,
जम्बूद्वीप महान, अडिग और सुहानी।
हिमालय का मस्तक ऊँचा,
सागर धोता चरण,
हर नदी गाती एक कहानी,
हर पत्थर में है एक दर्शन।
सात द्वीपों का महान विस्तार,
भारत की अनूठी पहचान।
हृदय की धरती, कमल खिला,
पर्वत महान, दुख हरता।
संस्कृति का संगम यहाँ,
अनेकता में एकता का सार,
हर त्योहार एक कहानी कहता,
हर बोली में है प्रेम का संचार।
नवखंडों का मोती प्रकाशमान,
भारत भूमि का उज्ज्वल प्रतिबिंब।
कर्मभूमि, साधना की भूमि,
ऋषि-मुनि का वंदन, उनका जय।
गुरुओं ने यहाँ सत्य खोजा,
शिष्यों ने ज्ञान का दीप जलाया,
आध्यात्मिक चेतना का केंद्र,
जिसने विश्व को मार्ग दिखाया।
देवों का निवास ऊपर लोकों में,
मुक्ति हेतु यहाँ आते हैं।
बंधन सब यहीं खुलते हैं,
पथ मोक्ष का यहीं मिलते हैं।
यह वह भूमि है जहाँ बुद्ध ने सत्य पाया,
महावीर ने अहिंसा सिखाई,
गुरु नानक ने प्रेम का संदेश दिया,
हर संत ने यहाँ रोशनी फैलाई।
क्लिष्ट युग में भी मन झुका,
इस पुण्यभूमि की वंदना कर।
धन्य है जन्म यहाँ जिसे मिला,
मुक्ति का सरल मार्ग पाया।
यहाँ की मिट्टी में इतिहास है,
हवा में अध्यात्म का वास,
यह भूमि हर युग में देती रही है,
जीवन को एक नया प्रकाश।
आवश्यकता नहीं और विस्तार का,
जब दूसरी दिशाएँ इसकी प्रशंसा करें।
भारत की महिमा, सनातन सत्य,
अमर, अविनाशी, अनंत पथ।
सदियों से यह गाथा चलती रही है,
सदियों तक यह चलती रहेगी,
यह धरती अपनी पहचान,
अपने गौरव से कभी न हटेगी।

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