रात की रानी

जैसे रात की रानी के फूल झरते हैं, बिखरते हैं,

मैं खड़ा हूँ चाँदनी में, पीड़ा का सागर लिए।

तुम्हारी छुअन जैसे मंद हवा का झोंका,

भूलेपन की बारिश में भी स्मृति अटल बनी रहे।  


आंसुओं के फूलों में जलती है आग मेरी,

बसंत की लालसा फिर भी मन में खिलती है।

संवेदनशील हाथों का तेरा स्पर्श पाने को,

मैं प्रतीक्षा करता रहा, मृत्यु तक भी तेरा इंतजार।  


वो प्रेम का गीत, जो क्षणभर मेरी आत्मा ने सुना,

अंतहीन उष्मा, कभी न ठंडी होने वाली।

मिट्टी में दफन हो जाए आग, फिर भी,

तेरी यादें भरें मेरे हृदय का आंगन।  


दूर होकर भी, तू मेरे स्वप्नों में समाई है,

जैसे चमेली की बेल, सौम्य छाया डालती है।

रात की ठंडी सांस में, एक बूंद वर्षा की,

तू जला देती है प्रेम का दीप मेरे सीने में।  


अगर जीवन की राह से तू अदृश्य हो जाए,

फिर भी प्रेम की लौ जलती ही रहेगी।

इस अंधकारमय मार्ग में, तू मेरी मार्गदर्शिका,

सदा प्रज्वलित, मेरी आत्मा के कोर में।  


ओस की बूंद जैसी, तू मेरे हृदय में घुल गई,

मृदुल मुस्कान जैसी, स्थिर, कभी न मुरझाने वाली।

जैसे सुबह की सुनहरी किरणें शाम को स्थान देती हैं,

मेरा प्रेमगीत, तुझ संग, विश्राम पाएगा।

Comments

Popular posts from this blog

एक परछाई सी चलती है मेरे साथ

पवित्रता की परछाईं

ज़ंजीरों का विनाश: मानवता का आह्वान

एक ही आकाश तले

आशय की सांसें

आत्मा का सफ़र

विरासत की आहट

वह अनसुना नायक

लालफ़ीतों का साम्राज्य

दो बहनों की कथा: यमुना, यामिनी और मृत्यु का संदेश