लालफ़ीतों का साम्राज्य

काग़ज़ की भूलभुलैया में फँसी है दुनिया,

फ़ाइलों के ढेर में दबा है सच्चाई का तिनका।

हस्ताक्षरों की लंबी कतार में,

लोगों की जानें अटक गई हैं।


एक मुहर के लिए हफ़्तों का इंतज़ार,

एक दस्तख़त के लिए बरसों का ख़ुमार।

दफ़्तर के गलियारों में वक़्त घिसटता है,

जैसे रेतघड़ी में आख़िरी कण अटक गया हो।


मेज़ के पीछे बैठे देवता,

क़लम की नोक से किस्मत लिखते हैं,

पर स्याही सूख चुकी है —

और लोग प्यास से मर रहे हैं।


जहाँ आग लगी है, वहाँ फ़ाइल खोजी जाती है,

जहाँ भूख लगी है, वहाँ बैठक बुलाई जाती है,

जहाँ न्याय चाहिए, वहाँ ‘प्रक्रिया’ सुनाई जाती है।


ब्यूरोक्रेसी — वह अदृश्य जाल,

जो समय को निगलता है,

और इंसान को इंतज़ार में बदल देता है।

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