आशा का सफर, टूटे ख्वाब


वे आए थे उम्मीदों की चादर ओढ़े,

हाथों में सपनों का तोहफा लिए,

पर जीवन ने लिखा एक अलग कहानी,

जिसमें आसमान का रंग फीका हुआ पड़ा।  


एक बीमारी ने छीन लिया सब कुछ,

खुली आँखों में घुसी वीरानी,

डॉक्टर की हल्की मुस्कान में डर छुपा,

हर जांच में छिपी अनगिनत बातें।  


सफ़ेद दीवारें, जहाँ खामोशी का शोर,

बच्चे की नन्ही मुस्कान पर खतरा मंडराए,

माता-पिता की आंखों में अनंत रातें,

आशा की लौ बुझने लगी हर बार।  


ऋण की लहरें उठीं जैसे तूफ़ान,

प्रार्थनाएँ टूटे हुए मन से,

हर फॉर्म, हर फीस का बोझ भारी,

हाथ कांपते, आवाज़ डूब जाती है।  


रात की खामोशी में सवाल उठते,

"क्या मेरी गलती है? मैं क्यों कमज़ोर?"

शर्म का सागर, खुद से लड़ते,

आत्मा में छुपी हताशा का शोर।  


चिंता का ज्वार, डिप्रेशन की छाया,

मुस्कान की परत के पीछे छुपा दर्द,

आँखें लाल, मन थका—

जीवन का संघर्ष, अनसुना सा गीत।  


ख्वाब टूटे, भविष्य धुँधला,

विश्वास की धड़कनें धीमी पड़तीं,

आशा की किरणें भी फिसल गई रेत की तरह,

किसी अनजान हाथ ने पकड़ छोड़ा।  


मगर, फिर भी हर दिन उठते हैं वे,

अंधकार से लड़ते, नई सुबह की राह देखते,

आशाओं का दीप जलाते हैं,

उस दिल की अनकही जंग लड़ते हैं।  


अगर आप उन्हें देख पाएं,

ख़ामोशी में छुपी हुई वो कहानी,

तो बस इतना समझिए,

उनकी चुप्पी ही उनकी सबसे तेज़ आवाज़ है। 

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