प्रकाश और छाया

 प्राचीन धूल से उभरती आत्मा का सफर,

भोर और संध्या के अनगिनत सफर।

हमारा लक्ष्य है पवित्र प्रेम का दीप,

अव्यर्थता को त्याग, खोजें जीवन का मर्म।  


अंधकार में कहीं खो जाएं तो क्या,

सच्चाई की राहें ही हैं हमारी आशा।

शुद्ध हृदय मंदिर की ज्योति जलाएं,

सत्य का प्रतिबिंब बन, अंधकार मिटाएं।  


यह केवल अपने लिए नहीं, यह है आंतरिक प्रकाश,

साझा करें प्रेम की किरणें, बनें एक स्वप्न का सार।

यदि आत्माएँ स्वार्थ की जंजीरों में जकड़ी हैं,

तो संवाद और संबंध खामोशी में दब जाएं।  


प्रेम ही भाषा है, जो हर दिल समझता है,

सहायता के हाथों में ही रची जाती है बात।

सुनने का कान, साझा भोजन का जज़्बा,

संदेह मिटाए, भय दूर करें, बनें एक साथ।  


मगर यदि मन का मौन गहराई में उतर जाए,

अन्‍हीं जरूरतों का शोर हवा में फैल जाए।

तो क्षमा बन जाए शांति का स्रोत,

आत्मा को ऊंचाई दे, खोलें हर जंजीर का छोर।  


स्वार्थरहित कर्म हैं सबसे बड़ा उपहार,

दुनिया की टूटी-फूटी रचनाओं को जोड़ने का प्रयास।

हर आत्मा में चमकने का अवसर है,

सशक्त हाथ से, दैवीय स्पर्श का आह्वान।  


वर्ना उदासीनता विनाश का संकेत,

पीड़ा ही रहेगी राज, झेलते रहेंगे हर जंजाल।

विश्वास से चलें, मार्ग हो सच्चा और स्थिर,

सपनों का संसार बनाएं, प्रेम का संचार हर दिशा में।  


आइए जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाएं,

प्रेम के गीत गाते हुए हर कदम बढ़ाएं।

हाथों में हाथ डाल, इस यात्रा को सजाएं,

विखंडन, भय और कलह को दूर कर स्वर्ग बनाएं।

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