दो बहनों की कथा: यमुना, यामिनी और मृत्यु का संदेश
गहरे समय के स्याह जाल में,
जहाँ पुरानी कथाएँ आराम करती हैं,
दो बहनें हैं, रहस्यों की माला,
एक का नाम यमुना, जीवन का प्रवाह।
उसके जल में बसते हैं प्रेम के गीत,
कृष्ण की मुरली की मधुर धुनें,
आँसुओं की झरनों में झलकते हैं,
मोहब्बत की कहानी, हर धड़कन में।
यमुना का पानी, निर्मल और उज्ज्वल,
सपनों का संगम, सूर्य की किरणें,
प्रकृति का जीवन, हर पल बुनती,
आशा का संदेश, हर लहर में।
उसकी बहन, यामिनी, छाया में लिपटी,
संध्या की चादर, रात्रि का सपना,
मूक वादियों में खोई, शांति का गीत,
सांझ की खामोशी, जिसमें सब कुछ छुपा।
उसके किनारे एक फूल खिला,
ब्रह्मांड का चिह्न, सिग्नस का प्रतीक,
ब्रह्मांड का चमत्कार, जीवन का संकेत,
रात्रि की सीमा, प्रकाश का सागर।
यमराज के द्वार पर आई वह,
जीवन का सेतु, दुःख का क्षणिक विराम,
सपनों का उपहार, प्रेम का संदेश,
मृत्यु के अंधकार में भी उजियाला लाने।
साहसी, गहरी और गुनगुनाती,
रात्रि की बेटी, अनंत सफर की साथी,
अंतिम यात्रा का वह मार्ग,
जहां से फिर नई शुरुआत की शुरुआत होती।
राधीदेव के वनों में घूमते हुए,
चाँद की रौशनी में खिली-खिली,
मोहब्बत की उस कहानी को कहती,
आसमान की चाँदनी में, सपनों का संसार।
यमराज के द्वार पर खड़ी होकर,
अपनी मुस्कान और प्रेम का उपहार,
जीवन का संगीत, मृत्यु का अंत नहीं,
बल्कि एक नए आरंभ का द्वार।
उसने कहा, "अंधकार को मत समझो,
यह तो बस एक नई राह का संकेत है,
सपनों का संसार, जीवन का संगीत,
जहां हर अंत के बाद, शुरूआत होती है।"
वह वापस लौट आई अपने घर,
प्रेम और आशा की कहानी सुनाने,
दो बहनों की यह अनोखी कथा,
चाँदनी में झरती, सपनों की रीत।
अब उनकी आवाज़ें,
मौसम में घुली, हवा में बसीं,
सपनों का संगीत, जीवन की झरना,
जो हर दिल को छू जाती हैं।

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