हर रात, तुम आते हो
जैसे चाँद की हल्की रोशनी, जो हर अंधकार को चुराकर लाती है।
उन ख्वाबों में, जहाँ समय रुक जाता है,
जहाँ प्यार और खोने का खेल चलता रहता है,
जैसे नदी का बहाव, जो कहीं नहीं रुकता।
तुम्हारा चेहरा धुंधली रोशनी में झलकता है,
मुस्कान, जो गर्माहट और उदासी का मेल है,
जैसे धूप में जमी हुई ओस की बूंदें,
या बारिश की अंतिम बूंदें, जो अभी भी आसमान में मुस्कुरा रही हों।
एक पुराना भूत, जो रात में नाचता रहता है,
अच्छे-बुरे पल, दोनों में झूमता यह साया,
जैसे ख्वाबों की परछाई, जो कभी भी साथ नहीं छोड़ती,
या पुरानी किताब की वह तस्वीर, जिसे बार-बार खोलते हैं।
मैं अपनी थकी आँखें बंद करने की कोशिश करता हूँ,
जैसे सूर्य अपने अस्त होने से पहले छुप जाता है,
तुम्हें पीछे छोड़ने का प्रयास,
पर तुम फिर भी आते हो, एक कोमल मुस्कान बनकर,
मेरे दिमाग में तुम्हारी आवाज़ गूंजती रहती है,
जैसे हवा में घुली हुई कोई कविता,
मैं अतीत और वर्तमान के बीच फंसा हूँ,
उन यादों और ख्वाबों के बीच, जो एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं।
एक शांत सा कारण, जिसे मैं नाम नहीं दे पाता,
जैसे अनजान रास्ता, जो कहीं खत्म नहीं होता,
जो मुझे तुम्हारे उजाले से दूर रखता है,
जैसे बादल का पर्दा, जो सूरज को छुपा लेता है।
दिल टूटता है, पर झुकता नहीं,
मैं हाथ बढ़ाता हूँ, और फिर भाग जाता हूँ,
जैसे मोमबत्ती की लौ, जो हर बार बुझ जाती है,
पर उसकी उम्मीद की किरण कभी कम नहीं होती।
यह संघर्ष है, यह जंग है,
जहाँ हार कर भी, मैं फिर से खड़ा हो जाता हूँ,
जैसे नदी अपनी धारा से नहीं रुकती,
वैसे ही मैं अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहता हूँ।
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