आत्मा की फसल


हर छोटे काम में छिपी है, मेहनत की बहार।

श्रम से मिलता है मीठा फल, हर बार।

एक वादा जो कहता है, कि गहरे खजाने मिलेंगे,

जब तुम अपने भीतर के मुखौटे को हटाओगे।

चलो, चुनौती स्वीकार करो, और सार्थक बनाओ हर क्षण!


हाँ, मिलती है दौलत और सम्मान,

ये हैं क्षणिक सुख, जो आते हैं मेहमान बनकर।

कोई बोनस दे देता है, कोई एहसान जताता है,

ये बाहरी खुशियाँ पल भर के लिए मन को भाती हैं।

ये तो वो बीज हैं जो हवा के साथ उड़ जाते हैं,

आज यहाँ, कल वहाँ।

ये तुम्हारी उड़ान को गति देते हैं, पर ये मंज़िल नहीं।


पर एक दौलत और भी है, जो दिल के कोने में रहती है,

इसे कोई दे नहीं सकता, ये तो बस कमाई जाती है।

ये है काम करने की संतुष्टि, जो आत्मा को सुकून देती है,

ये है वो साहस, जो दिल को फिर से धड़कना सिखाता है।

जब तुम अपने हर प्रयास को एक साथ जोड़ते हो,

तब अंदर एक नई रोशनी जगती है,

जिसे केवल मेहनती ही देख पाता है।

यह खुशी हर पल नई और ताज़ा होती है।


तो वो काम करो जो तुम्हें मजबूत बनाते हैं,

उन कामों में नहीं, जहाँ सिर्फ बाहरी इनाम मिलते हैं।

जानो, सबसे बड़ी दौलत तुम्हारे सीने में है,

जिसे तुमने अपनी मेहनत से कमाया है।

यह तुम्हारे दिल की अपनी फसल है, जो तुम्हारे साथ हमेशा रहेगी।

अपनी शक्ति को जगाओ, और खुद को साबित करो!

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