इच्छा और चाह
प्राचीन गलियों में, जहाँ छायाएँ नाचतीं,
रात और दिन की एक कहानी गूँजती।
दिल थे बेचैन, लालसा से भरे,
जैसे आग हो, जो सब कुछ जला दे।
शहरों की गलियों में, हवा के गीतों के संग,
मिलते थे वे लोग, सपनों के संग।
नज़रें थीं तेज़, मन था बहका,
ढूँढ़ते थे खुशियों का सपना टटका।
क्या तुम देख रहे हो? मैं देख रहा हूँ।
उनकी चाह थी, जो न थी सरल,
भीड़ में ढूँढ़ते थे सुकून का मचल।
पर दिल में छुपी थी एक ख्वाहिश बड़ी,
जिसने उनसे छीनी सच्ची खुशी।
हर चेहरे में तलाशते थे सौंदर्य,
एक नजर, एक छुअन, एक प्यारी कहानी।
पर जो चाहते थे, था जंगली और कठिन,
हर दिल पर राज करने की चाह।
क्या तुम देख रहे हो? मैं देख रहा हूँ।
मंदिरों की गूँजती आवाज़ें सुनाई दीं,
मधुर वादों की मिठास बरसाई।
पर सच था काला, छुपा हुआ गहराई में,
प्रेम खो गया लालसा की बेड़ियों में।
रेशमी धागों से बंधे थे उनके खेल,
सपनों में खो गए, नाम न था किसी मेल।
पर छिपे थे अंधेरे, चोटें थी गहरी,
प्रेम की कीमत थी टूटे वादों की धुरी।
उनकी हँसी थी गूंजती रात भर,
पर दिलों में थी बुझती सी चिंगारी।
हर दिल जीतने के चक्कर में,
छोड़ गए वे दुख और पाप के निशान।
गुप्त बातों में बढ़ती थी फुसफुसाहट,
टूटे वादे, नए दिलों की बात।
पर वे नाचे, लालसा के मर्द,
क्षणिक खुशी और विश्वास के साथ।
क्या तुम देख रहे हो? मैं देख रहा हूँ।
भोज और खुशी में छुपा था डर,
उनकी लालसा में छुपा था झूठा सफर।
वो खो गए प्रेम की गर्माहट में,
जो देती है दिल को सच्चा असर।
चाँद की रोशनी में नीरस रातें,
निष्पाप दिल टूटे, मन सूना।
चाँद की किरणें, जैसे मूरतें भटकती,
सपनों की रेत में विलीन होती।
और सुबह आई, रंगों के संग,
चुप्पी टूटी, गूँज उठे जज़्बात।
पर उनकी करतूतों की परछाईं बची,
कहानियों में बंधा प्रेम धीमा हुआ।
वे भागते रहे रात की परछाइयों के पीछे,
पर पाए नहीं शांति, न कोई सच्चा प्रकाश।
लालसा एक आग थी, जलती तेज़,
पर बस छोड़ गई राख, खो गया सब।
क्या तुम देख रहे हो? मैं देख रहा हूँ।
हे क्रूर लालसा, नियति की मार,
जो दिलों को बहकाती बार-बार।
सुख, शक्ति या अधिकार की तलाश में,
खो दिया सब कुछ, असली उजियारा।
तो सुनो यह कथा, लालसापूर्ण पुरुषों की,
हर जीत के पीछे छुपी है कहानी।
जो बताती है उनके पतन का सबब,
गहरे साये में सुनती पुकार।
सच्चे प्रेम की राह पकड़ो बुद्धिमानी से,
जो वक्त के थपेड़ों में भी न खो पाए।
राह दिखाओ कोमल और शांति से,
बांधो ऐसा बंधन, जो न हो रेत जैसा।
अंत में, वही है जिसे हम ढूंढ़ते,
कोमल प्रेम, जो है मजबूत और नम्र।
लालसा से ऊपर, साझा कष्टों में,
जहां दिल जुड़े, और आत्मा खुलें।
आओ सीखें पुरानी कहानियों से,
जज़्बातों में छुपा है कुछ और।
क्षणिक लालसा और मांगों से परे,
प्रेम रहता है, जहां भरोसा है।

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