पंखों की पुकार
हर पंख का संघर्ष, हर सपना सुहानी।
वहां जहाँ बादल भी घिरे रहते हैं,
वहाँ भी उम्मीदें अपनी कहानी लिखते हैं।
छोटे दिल में छिपे हैं बड़े अरमान,
आशाओं का ज्वार है, पर डर का भी समान।
आत्मा में छुपा एक जज़्बा है,
जो कहता है, अभी तो शुरुआत है।
तूफान आते हैं, हवाएँ तेज़ चलती हैं,
मगर पंखों का साहस फिर भी नहीं झलकता है।
वहां संघर्ष की मशाल जलती है,
जो हमें सिखाती है, कैसे गिरकर उठना है।
अंदर की शक्ति को जगाना पड़ता है,
बिना निडरता के उड़ान नहीं भरनी पड़ती है।
खुद पर भरोसा करना ही बड़ी बात है,
तभी तो आकाश के पार जाना आसान है।
घर का आराम छोड़ना कठिन है,
पर मंजिलें वहीं मिलती हैं,
जहां डर भी है, पर चाह भी है।
मजबूत बनो, अपने पंख फैलाओ,
खुले आसमान में उड़ान भरो।
सितारों की ओर बढ़ो,
अंधेरे से मत डरो,
क्योंकि हर उड़ान के साथ,
खुशियों का एक संसार बनता है।
यह रास्ता आसान नहीं है,
पर जो भी चलता है, मंजिल उसकी है।
सपनों की ओर कदम बढ़ाओ,
दृढ़ता और साहस से अपने पंख फैलाओ।
अकेले चलो, पर कभी हार मत मानो,
यह आकाश तुम्हारा है,
इसे अपना बनाने का समय है।
खुशियों का सूरज उगाने का,
उड़ान भरने का, अपने सपनों को सच करने का।
आसमान की पुकार सुनो,
और अपने पंखों को खोलो,
क्योंकि वहाँ ऊपर,
तुम्हारी मंजिल इंतजार कर रही है।

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