हमारा घर

(पूर्णता नहीं, प्रेम की कृपा से निर्मित)


मेरा हृदय था एक कोरा कैनवास,

मिला तुम्हारे रंगीन दिल से —

जिसमें हज़ारों टूटे दरवाज़े थे,

हर दरार में छुपे काँच जैसे सपने।


तुमने कभी कोशिश न की

मेरे टूटे किनारों को सीधा करने की,

ना ही दरारों को छुपाया —

बस देखा उनमें एक जीवंत कहानी।


पुरानी किताबों की तरह,

हमारे पन्ने समय से घिस चले,

हमने वे अध्याय साझा किए —

जीतों की झलक और तूफ़ानों के पल।


तुमने पढ़े वो पन्ने भी,

जो मैंने शर्म से छुपा रखे थे,

फिर भी उनमें तुमने पाया

हमारे दिल की धड़कनों का संगीत।


हम कोई चमकते हीरे नहीं,

ना पूर्ण, ना उज्ज्वल, ना ठंडे,

हम दो पुराने पत्थर हैं —

वक़्त की कोमलता से बने कोमल और गहरे।


हम आँसुओं से गढ़े गए हैं,

संघर्षों से मिली है पहचान,

हमारी तीखी खामियाँ ही हैं

जो हमें बाँधती हैं — एक अमिट विधान।


प्रेम कोई सुरीला गीत नहीं,

ना कोई लयबद्ध रचना,

यह दो अधूरे स्वरों का संगम है —

एक अनोखा, मुक्त, सहज प्रवाह।


इन दरारों से छनती है रौशनी,

जैसे तारे झाँकते हों शीशे के पार,

और यही टूटे हुए किनारे

सुनहरी चमक से बुनते हैं सपनों का संसार।


तो आओ, हम अपने घावों को अपनाएँ,

हर निशान एक राह दिखाता है,

ये वे युद्ध हैं जो भीतर लड़े गए,

और मौन सहनशीलता से जीते गए।


इन दो आत्माओं के इस संगम में

हमें मिल गई एक पावन भूमि,

जहाँ पूर्णता की कोई चाह नहीं —

बस मानवीय दया की गहराई है अपनी धुरी।



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