तुम्हारे रंगों में मेरा संसार
भोर की पहली किरण जब आँगन में उतरती है,
मुझे तुम्हारा चेहरा याद आता है—
शांत, पर भीतर से उजला,
जैसे रात के बाद का सबसे पवित्र उजाला।
तुम्हारा धैर्य
जैसे ऊँचा पहाड़,
जो आँधियों में भी स्थिर खड़ा रहता है।
तुम्हारा विश्वास
जैसे दीपक की लौ,
जो सबसे अंधेरी राह में भी बुझती नहीं।
तुम्हारी मुस्कान
थके मन के लिए वर्षा की पहली बूँद है,
जो सारी धूल, सारा बोझ
धीरे-धीरे धो देती है।
तुम्हारा स्नेह
एक गरम चादर है—
सर्दियों की आधी रात में
जिसमें लिपटकर
सारे डर सो जाते हैं।
तुम्हारा देना
नदी के प्रवाह सा है—
न माप, न रोक, न शर्त।
तुम्हारे हाथों से
आशीष की तरह बहता है सुख।
तुम्हारा सम्मान
जैसे किसी मंदिर का घंटा—
जिसकी ध्वनि हर किसी तक पहुँचती है,
और हर आत्मा को याद दिलाती है
कि वह भी पूजनीय है।
मैं चाहता हूँ
कि ये सभी रंग—
धैर्य, विश्वास, स्नेह, करुणा—
मेरे जीवन के चित्र में उतर जाएँ।
और सबसे गहरा रंग हो—
तुम्हारा साथ।
क्योंकि मेरे लिए
जीवन का सबसे सुंदर रूप
तभी पूरा होता है
जब तुम्हारे साथ
हर दिन, हर साँस
उसकी कहानी बनती है।

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