स्मृति का बोझ
सुबह की पहली किरण में, एक नायक की पुकार गूँजी,
"आज की जीत मेरी है, मेरी बहादुरी की कहानी।
मैंने अंधेरों से लड़ाई लड़ी, जीत का मुकुट पहना,
मेरे हर कदम पर तालियाँ बजीं, इतिहास बना।"
लेकिन वक्त की नदी बहती रही, साथ सब कुछ ले जाती है,
पुरानी यादें धुंधली होने लगीं, सम्मान भी मुरझाने लगा।
जो कभी पूजनीय था, अब उपहास का पात्र बन गया,
नई पीढ़ियाँ पुरानी कहानियों को भुलाने लगीं। .
आगे बढ़ते कदमों के साथ, नाम भी धुंधला होने लगा,
वह जो सम्मान का प्रतीक था, अब बेअसर हो गया।
सवाल उठते हैं, हँसी उड़ती है, बहादुरी पर भी संदेह होता है,
अतीत की कहानी विकृत, हवा में उड़ने लगी।
जिस जमीन को हमने पवित्र माना, उस पर अब संदेह की छाया,
यादें भी इतिहास में खोने लगीं, वक़्त के साथ साथ।
फिर भी, हम खड़े रहते हैं, शांत और मजबूत,
हमारी पहचान, हमारा साहस, कभी नहीं मिटेगा।
साहस, सच्चाई और मर्यादा का संदेश,
समय की आँधियों में भी अडिग रहता है।
कुछ बातें गहरी हैं, जो अनंत तक चमकती रहती हैं,
अपनों की यादें, और उनका सम्मान, कभी नहीं मिटता।
तो आइए, याद करें उन वीरों को,
जिनकी चमक फीकी पड़ गई है, पर खत्म नहीं हुई।
क्योंकि इतिहास का आईना दिखाता है,
सच्चाई का असली अर्थ क्या है।
भले ही हम दुनिया की नज़रों से दूर हो जाएँ,
हमारा असली सच, अपने इंतज़ार में रहता है,
क्योंकि बहादुरी और सम्मान की कहानी,
कभी भी नहीं मरती, बस नए सिरे से जन्म लेती है।
Comments
Post a Comment