स्वाभिमान की राह

क़ीमत न मापी जाती है किसी जोर से,

ना बंधती है वह तख़्तों के ठौर से।

ख़ामोशी में छुपा एक नाम होता है,

जो दिल की गहराई में गूंजता रहता है।


शक्ति न गवाओ व्यर्थ की भीख मांग में,

ना बेचो गरिमा, आराम की राह संग में।

वहीं है मंज़िल जो दिल से अपनाई जाए,

जहाँ खुद को पाने की खुशी मिल पाए।


ना चाहो किसी की निगाहों की तारीफ़,

ना ढूंढ़ो मंज़िल उन्हें खुश करने की कोशिश।

अपने आसमान में उड़ान भर लो,

जहाँ आत्मा की शांति हो, वहीं थम लो।


अगर दरवाज़ा बंद हो, राह हो रोक दी,

ना ठोको, ना अपील करो किसी से जिद्दी।

मेरी क़ीमत कोई खेल नहीं ताश का,

जो बिके, वो नहीं है मेरा विश्वास का।


जो लोग ज़हर बोते हैं अपने शब्दों में,

उनकी दीवारें न मेरे घर की छाँव बनें।

क्यों थामूं मैं उनका नकली सिंहासन,

जब मैं अकेला भी चल सकूँ अपनी पहचान।


तेज शब्दों की धार काटती है गहरी,

सुनती नहीं कान वे, जो हैं मुँह फेरे।

बात करना व्यर्थ जब मन है बंद,

चुप्पी को दो स्थान, जहां मिले सुकून।


क्यों पानी दूँ सूखी माटी को,

क्यों लड़ूं मैं मुरझाए आसमां से?

जहाँ सूरज गर्मी दे, वहाँ बगीचा बसा,

जहाँ उड़ सकें दिल, हो स्वतंत्र हवा।


मौन मेरी आख़िरी गुहार है,

ग़ायब रहना मेरा आख़िरी इकरार है।

जो हवा वे साँस लेते हैं, वो मेरी नहीं,

मेरी शांति का मोल है इससे कहीं बड़ी।


इसलिए लौटो, चलो, छोडो बोझ,

मन को ढ़ालो फिर से नई आशा की ओर।

हर कदम पर छूटे वो दर्द पुराना,

चलो उस राह पर जो सच्चा और प्यारा।


जहाँ मैं खुद को पाऊँ, सच्चाई से जुड़ा,

जहाँ मेरा आत्मा शांति से गुनगुनाए।


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