सच्ची दौलत


सोना, चमक और नाम के पीछे हम भागते हैं,

दुनिया ताली बजाती है, हम खेल खेलते हैं।

अलमारियों पर ट्रॉफियां चमकती हैं भीड़ में,

पर हमें खुद से ही पूछना पड़ता है:


क्या रहता है सच में, जब रोशनी मंद हो जाती है,

जब हर गीत की गूंज शांत हो जाती है?

क्या थाम सकते हैं हम, जब हाथ शांत हो जाते हैं-

क्या आत्मा को भरता है, इच्छा से भी बढ़कर?


तुमने मुझे दौलत दी, एक बड़ा बंगला दिया,

पर शांति ने अंदर आने से मना कर दिया।

तुमने प्रशंसा दी, एक गर्जन करती भीड़ दी,

पर खामोशी ने ज्यादा साफ, ज्यादा ऊँची बात कही।


तुम्हारी खुशी, एक अच्छे काम से मिली-

एक लड़ाई लड़ी, एक शिखर जीता-

तुमने अपनी कहानी सुनाई, मैंने सब सुना,

पर फिर भी मैंने कोई उठान या गिरावट महसूस नहीं की।


क्योंकि कुछ इनाम दिए नहीं जा सकते,

वे हमारे जीने के तरीके से अंदर गढ़े जाते हैं।

एक सबक जो कमाया, एक सच्चाई जो अपनाई,

उसे कोई और बदल नहीं सकता।


वह प्यार जो ठीक करने वाले हाथों से खिला,

वे घाव जिन्हें समय और परीक्षाओं ने भर दिया,

सही चुनने से मिला शांत गर्व-

ये आत्मा से दृष्टि में नहीं जा सकते।


तो उन चीजों का पीछा करो जो तुम्हारी लौ को खिलाती हैं,

न कि क्षणिक दौलत या उधार का नाम।

सबसे सच्चा इनाम, कोई और नहीं दे सकता-

यह तुम्हारे भीतर रहता है, शुरू से अंत तक।।

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