अजनबियों में ईश्वर

 वह अनजान रास्ता, वह सूनी गली,

जहाँ कदम ठहरे, पर दिल चलता रहता है,

आँखें मिलीं किसी अनजाने में,

जैसे कोई पुराना सपना जाग उठा हो।  


शाम की हल्की धूप में,

जब सब कुछ खामोशी में डूबा हो,

एक मुस्कान का टुकड़ा, एक सहारा,

वह भी तो किसी फरिश्ते का संदेश हो।  


वे चेहरे, जो कभी न जाने पहचाने,

फिर भी भीतर का कोई कोना छू जाते हैं,

उनमें ईश्वर का सुकून छिपा होता है—

जैसे हवा का हल्का झोंका, जो राहत लाता है।  


अस्पताल की सफ़ेद दीवारें,आने वाले खतरों में

जहाँ दर्द और आशा का मेल होता है,

वहाँ भी कोई अजनबी,

अपनी मुस्कान से दर्द का मरहम लगाता है।  


खुशियों के छोटे-छोटे पल,

जैसे बारिश की बूँदें, जो मिट्टी को सींच जाती हैं,

वहां भी तो ईश्वर का ही कोई रूप होता है—

छोटी छोटी बातें, बड़े जज़्बे का इशारा।  


रात के सन्नाटे में, जब सब सो रहे होते हैं,

तब भी कहीं न कहीं, एक आवाज़ सुनाई देती है—

मुस्कुराहट का सुर, एक सहारा,

जो टूटे हुए दिलों को जोड़ने का नाम है।  


वह भी तो कभी किसी अनजान में छुपा होता है,

जैसे कोई फूल, जो बिना पहचाने ही खिल जाता है,

और हमें सिखाता है—

अजनबियों में भी ईश्वर बसता है।  


क्योंकि ईश्वर का रूप बदलता है,

कभी मुस्कान का, कभी आँसुओं का—

और वह हर एक आँख में, हर एक दिल में,

छुपा होता है, बस खोजने की देर है।  


जैसे सुबह की पहली किरण,

अंधकार को चीर कर आती है,

उसी तरह, ईश्वर का प्रकाश भी

अंधकार में भी कहीं झलकता है।  


वह अनजान हाथ, जो सहारा बन जाता है,

वह हसीन पल, जो जीवन का संगीत बन जाता है,

वह छोटी-सी बात, जो दिल को छू जाती है—

यह सब तो ईश्वर की ही उपस्थिति है।  


क्योंकि जीवन की हर कथा में,

हर मुस्कान और आँसू में,

छुपा है दिव्यता का जज़्बा,

अजनबियों की इन छोटी-छोटी कहानियों में।  


तो चलिए, इन अनजान चेहरों को देखें,

इन छोटी-छोटी बातों में ईश्वर को पहचानें,

क्योंकि वही तो है, जो हर पल हमारे साथ है—

अजनबियों में भी ईश्वर का वास है।

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