जब तुम ज़िंदगी में आए


 

मेरी दुनिया थी एक शांत कमरा,

जहाँ रंग थे फीके, धुंधले से।
फिर तुम आए जैसे कोई बहार,
और छू लिया मन के हर कोने को धीरे से।

सिर्फ एक बार, मैं मानता हूँ सच में,
ज़िंदगी में आता है कोई ऐसा इंसान,
जो सांसों में रंग भर दे गहराई से,
और जगा दे हर भूला हुआ अरमान।

तुमसे मैंने वो सब कह डाला,
जो कभी किसी से नहीं कहा।
हारे हुए ख्वाब, अधूरे इरादे,
तुमने सुना, समझा और हर दर्द सहा।

तुम्हारे साथ हर छोटी बात,
बन जाती है कोई अनमोल खजाना।
एक चुप्पी, एक गीत, एक शाम की सैर,
सब हो जाते हैं यादों का ठिकाना।

न कोई दिखावा, न कोई बहाना,
तुम्हारे साथ बस मैं ही मैं हूँ।
तुमने मुझे अपनाया वैसे ही,
जैसे मैं था — बिना कोई गुनाह, बिना कोई जुनून।

तुम्हारी आँखों में जब देखता हूँ,
मुझे खुद से फिर प्यार हो जाता है।
तुम्हारा साथ जैसे कोई दुआ हो,
जो हर टूटे हिस्से को जोड़ जाता है।

न कोई जलन, न कोई मुकाबला,
बस एक सुकून है तुम्हारी मौजूदगी में।
बिना कुछ कहे, हर पल का मतलब
मिल जाता है तुम्हारी ख़ामोशी में।

तुमसे मिलकर जाना मैंने,
डर कर जीने से बेहतर है खुलकर टूट जाना।
क्योंकि उसी में छुपा है वो सुख,
जिसे पाकर दिल भी रोना चाहे और मुस्कुराना।

ये रिश्ता कोई पल भर की बात नहीं,
ये तो आत्मा की गहराई छूता है।
हर साँस में बस तुम्हारा नाम है,
तुमसे जुड़कर, जीवन पूरा होता है।

Comments

Popular posts from this blog

पवित्रता की परछाईं

आत्मा की फसल

स्थायी विरासत

प्रकाश की अनंत यात्रा

प्रकाश और छाया

जीवन की बाज़ी

विरासत की आहट

एक परछाई सी चलती है मेरे साथ

क्या तुम सच में भूखे हो?

छोड़ दो