बाँसुरी की आत्मा

 आसमान की फीकी चादर तले,

मैं अकेला चलता रहा,

सपनों का एक जाल बुनता रहा-

ऐसे सपने, जो आँखों ने कभी देखा नहीं,

जिन्हें केवल दिल महसूस कर सकता है।  


एक खोखला सरकंडा था मैं,

जिसे कभी किसी ने बेकार समझा,

फेंक दिया, अनदेखा, अनसुना-

पर अब प्यार से सँवारा गया हूँ,

गाने की आवाज़ बना, धीरे-धीरे देखभाल का प्रतीक।  


मैं एक बाँसुरी हूँ-

मेरी साँसें, एक अकेली धुन,

जो चाँदनी में भटकते हुए मन को सुकून दे,

उनके लिए, जो जिंदगी की राहों में खोए हैं।

दुख ने मुझे तराशा, फिर भी मैं बजता रहा,

मेरे सुर ठंडी हवा को भी गर्मी दे जाते हैं।  


मैं उन छोटे लोगों का साथी हूँ-

सड़क पर भटकते, भूले हुए,

जिनके हाथ कांपते हैं,

पर मेरी आवाज़ उनकी सुरक्षा बन जाती है।

मेरे सुर उनके डर को चुराते हैं,

और शांतिपूर्ण आश्रय बन जाते हैं।  


मैं उनके लिए ऐसे गीत गाता हूँ,

जो आसमान के धूसर रंग को नीला बना दें,

एक जीवन से भरे संगीत के टुकड़े,

जो शुद्ध हैं, सच्चे हैं, और दिल से निकले हैं।

हर सुर में, एक बच्चा है-

खुशियों का संदेश, बिना किसी जमा पूंजी के।  


लेकिन एक शाम, जब खामोशी ने मेरे गीत को घेर लिया,

डॉक्टर के शब्दों ने मुझे सुनाया:

“तुम्हारी साँसें अब ज्यादा दिन नहीं चलेंगी।”

मेरे फेफड़े, इस लकड़ी के ढाँचे में बंद,

मृत्यु की ओर बढ़ रहे हैं-फिर भी, मैं बजता रहा।  


मैं रोता नहीं, मैं हार मानता नहीं,

अपनी बाँसुरी को कसकर पकड़ता हूँ,

और कहता हूँ,

"जहाँ दर्द चुप था, वहाँ खुशी को पनपने दो।"

"मेरा शरीर मिट रहा है, पर मेरे सुर जीवित रहेंगे,

तुम्हें राह दिखाने, और जीवन का संगीत बनाए रखने।"  


मैं तुम्हें एक छोटे पौधे की ओर इशारा करता हूँ-

उम्मीद का बीज, मेरी पीड़ा से उगता हुआ,

जो जीवन का नया सवेरा लाता है।

"मैंने अपना काम पूरा कर लिया, अब तुम्हें शुरुआत करनी है,

इस गीत को अपने अंदर जीवित रखने की जिम्मेदारी।"  


हर पत्ते की तरह, एक प्रतिज्ञा बन जाओ-

हर जड़ एक नाता, धरती की गहराइयों से जुड़ा हुआ।

और जैसे ही मैं लेटता हूँ,

मेरी बाँसुरी, मेरे हाथ में,

हवा के साथ बहती है-मानो अंतिम आदेश।  


मेरा गीत चलता रहता है-

भले ही मेरी आँखें बंद हो चुकी हों,

यह तारों भरे आसमान के नीचे,

धीरे-धीरे गूंजता है।

मेरी साँसें चली गईं, पर धुनें रह गईं-

एक जीवन की बाँसुरी, जो एक बार बजाई गई,

फिर भी अनवरत बजती रहेगी।  


अब उस हरे पेड़ की छाया में,

तुम बढ़ते हो, हँसते हो,

और यादों में जीते हो।

क्योंकि एक कमजोर लड़का,

एक खोखली बाँसुरी की तरह,

अपनी आत्मा को उड़ेल गया-

और पीछे एक चमक छोड़ गया।  


भले ही साँस के खत्म होने पर खामोशी छा जाए,

मेरा गीत तुम्हारे अंदर जीवित रहेगा-मजबूत बनो।

हर सुर जो मैंने बजाया,

वह उम्मीद का बीज था-

दर्द को प्यार में बदलो, और उसे कसकर थामे रहो।  


जीवन छोटा है,

जैसे सरकंडे से बहती हवा,

पर प्यार का संगीत सदैव मार्ग दिखाएगा।

जब भी अंधेरा छाए,

मुझे याद करो-

वह बाँसुरी जिसने तुम्हें आज़ादी दी।  

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