लालच की सच्चाई

 

सुनहरी उम्मीदों की दुनिया में,

छुपा है एक अनकहा दर्द,

जहाँ दिल नहीं चाहते दौलत की माया,

पर लालच की खाली चमक उन्हें जकड़ लेती है।


हर चमकते सिक्के के पीछे,

गहरी परछाई छुपी होती है,

जो उजाले की जगह, अंधेरा फैलाती है,

और हर रात के सन्नाटे में सच्चाई छुप जाती है।


वह व्यापारी खड़ा है हाथ फैलाए,

मोहक सपनों का दाम बेचते हुए,

कहता है, "थोड़ा और लो, तुम्हारा संसार होगा रोशन,"

पर यह सब बस एक छलावा है, एक जाल।


जब सच सामने आता है,

तो दिल टूट जाता है,

क्योंकि दौलत की मुस्कान झूठी होती है,

और उसके पीछे सिर्फ डर छुपा होता है।


भूख से तड़पते परिवारों के बीच,

लोग सितारों को छूने की होड़ में,

भूल जाते हैं इंसानियत को,

और खो जाते हैं अपने ही सपनों में।


पहाड़ भी जब महलों में बदलते हैं,

तो भीतर का लालच भी गिरता है,

ख्वाब धुंधले हो जाते हैं,

और हंसी बस एक याद बनकर रह जाती है।


अंधेरी गलियों में,

जहाँ मासूमियत बिकती है,

खुशियाँ खो जाती हैं,

और चेहरे बस नकाब होते हैं।


क्षणिक सुख पाने के लिए,

जो सस्ते में मिलता है,

हम अपनी आत्मा की कीमत खो देते हैं,

और खालीपन में डूब जाते हैं।


शराब की बोतल में ढूँढ़ते हैं चैन,

पर वह चैन भी धोखा है,

आदतों की बेड़ियाँ कसती हैं,

और सब कुछ छिन जाता है।


लेनदार की किताबें ठंडी और सख्त होती हैं,

जैसे रात के अंधकार में फंदा,

ब्याज आसमान छूता है,

और आशाएँ दम तोड़ती हैं।


भविष्य, सपने और ज़मीन,

लालच के हाथों गिरवी रखे जाते हैं,

चुपचाप बने बोर्डरूम में,

जहाँ इंसानियत का सौदा होता है।


मज़दूर कुचले जाते हैं, संसाधन खत्म होते हैं,

और सब कुछ झूठे वादों पर टिका होता है।


जमीनें सूखती हैं, नदियाँ रुक जाती हैं,

लालच के बोझ तले दब जाती हैं,

वो वादा जो कभी किया था,

वह कहीं खो गया है।


फिर भी यह खेल चलता रहता है,

हर सुबह वही कहानी दोहराई जाती है,

जहाँ कुछ लोग सोच-समझकर कदम बढ़ाते हैं,

और कुछ लालच में फंस जाते हैं।


प्रकृति धीरे से फुसफुसाती है,

पेड़ों के बीच एक नम्र आवाज़—


"दौलत और शोहरत मत चाहो,

प्यार और दया ही सच्चा उजाला है।"


तो सोचो, मुसाफिर,

तुम्हारे पास जो है, उसकी कीमत समझो,

दिल की सुनो, क्योंकि वहीं है असली दौलत,

और वही दिखाएगा सच्चाई जो लालच छुपाता है।


लालच की कीमत बहुत भारी होती है,

यह तुम्हें गिरा सकती है, चाहे वादे कितने भी मीठे हों;

इसलिए सोच-समझकर चलो, दिल की राह पकड़ो,

क्योंकि प्यार ही है असली फल, बीज नहीं।

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