शाखा से मिट्टी तक

 

शाख पर जन्मा, एक कोमल अंकुर नया,

रेशम की तरह नरम, सुबह की ओस से लिपटा हुआ।

अनसुने सपनों के साथ, जीवंत हरे रंग में चमकता,

उम्मीद की एक लालटेन जैसा, जहाँ मासूमियत बहती थी।


फिर जवानी का जोश, पन्ने हरे रंग में खुले,

यह हवा के साथ एक रिबन की तरह नाचता था, जो धीरे से घूमता था।

हर गर्मी का सूरज, एक कहानी अंदर गढ़ता,

छाल पर नक्काशी की तरह, जहाँ बहादुर दिल शुरू होते हैं।


जब बड़े रिश्तेदार, फीके सोने में, जाने देते थे,

और धीरे से नीचे धरती पर गिर जाते थे,

जीवंत हरा रंग जवानी की खुशी से मज़ाक उड़ाता,

उस समय अनजान, कि उसका खुद का भाग्य जल्द ही वही होगा।


जैसे शरद ऋतु फुसफुसाती है, एक सुनहरा लाल रंग दिखाई दिया,

गोधूलि की चमक जैसा जब दिन का किनारा पास होता है।

जीवंत हरा रंग जले हुए पीले रंग में बदल गया,

पुरानी पोथी की तरह, जहाँ जीवन के सच सीखे जाते हैं।


आखिर में, एक मुरझाया हुआ घुंघराले, एक नाजुक, खामोश विनती,

शाखा ने छोड़ दिया—एक आह की तरह—जंगली और आज़ाद।

धरती पर एक कोमल पतन, उसकी यात्रा पूरी हुई,

एक कर्यिला अब, डूबते हुए सूरज के नीचे।


यह धरती पर लौटता है, एक चक्र को नवीनीकृत करने के लिए,

राख की तरह जड़ों में जो सुबह की ओस को जन्म देती हैं।

छोटे अंकुर से एक भूली हुई निशानी तक,

एक इंसान का जीवन, समय के अंतहीन स्थान में।....1


तो हर पल को संजोओ, हर बदलाव को अपनाओ,

बदलाव ही तो जीवन का असली स्वर है।

क्योंकि यह यात्रा है, निरंतर और अनंत,

प्रकृति की तरह, जीवन भी रहता है, सदाबहार।


अंत में, सीखो कि हर अंत में है नई शुरुआत,

जैसे मौसम बदलते हैं, वैसे ही जीवन चलता रहता।

मुलायम हवा का संगीत, परिवर्तन का संकेत,

यह जीवन का रहस्य है, जिसका कोई अंत नहीं। 


तो हर पल को संजोओ, भोर से फीकी रोशनी तक,

बदलावों को अपनाओ, सूक्ष्म और उज्ज्वल दोनों।

क्योंकि जीवन एक यात्रा है, एक चक्र हमेशा सच्चा,

एक खामोश वादा, मेरे लिए और तुम्हारे लिए।


और प्रकृति से सीखो, यह सच गहराई से है,

कि हर अंत में, नई शुरुआत सोती है।

एक कोमल ताल, जैसे मौसम बदलते हैं और मिलते हैं,

जीवन की अथक सुंदरता, हमेशा बिना अंत के।

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