उठो और उड़ो

जब जीवन की राहों पर, छाए घना अँधेरा,

और हर तरफ से सुनाई दे, निराशा का ये डेरा।

तब याद रखना तुम, भीतर जलती हुई उस लौ को,

जो तुम्हारी पहचान है, और देती है नया जोश।


माना दुनिया तुम्हें तोड़े, या कोशिश करे झुकाने की,

और मन में उठे लहर, गहरे में छिप जाने की।

पर सुनो, वो धड़कन जो सीने में गूँजती है,

एक शांत वादा है, जो हर डर को मिटाती है।


हर हार के बाद ही, मिलती है उठने की हिम्मत,

हर सबक से मिलती है, एक और नई क़ीमत।

जो ताकत तुम ढूँढते हो, वो कहीं और नहीं है,

तुम्हारे ही भीतर सोई है, बस जागने का इंतज़ार है।


तो अपनी नज़र उठाओ, वर्तमान के दर्द से दूर,

बारिश में भी खोजो तुम, सूरज की वो सुनहरी नूर।

तुम्हारा जीवन एक कैनवास है, तुम्हारे कला की प्रतीक्षा में,

एक साहस की रचना, जो तुम्हारे हृदय में है।


विश्वास करो उस उद्देश्य पर, जो तुम्हारे साथ है,

अपने सपनों की सिम्फनी बजाओ, जब तक साँस है।

तूफान भले कितनी भी तेज़ी से गरजें,

तुम ही हो वो राहगीर, जो मंज़िल तक पहुँचेंगे।


तुम ही हो वो मूर्तिकार, जो अपनी नियति गढ़ेगा,

तुम ही हो वो कलाकार, जो जीवन के द्वार पर खड़ा है।

अपने जुनून को दो पंख, अपनी आत्मा को उड़ान दो,

और उन लड़ाइयों को जीतो, जिनसे पहले तुम अनजान थे।

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