पिंजरा तोड़ दो
प्यारी बेटियों, उन नियमों को तोड़ दो जिन्होंने तुम्हारे पंखों को डर सिखाया, तुम पैदा नहीं हुई चुपचाप सहने के लिए, न ही घुट-घुटकर मिट जाने के लिए। *** उस नियम को तोड़ दो जो दर्द छिपाए, और चुप्पी को गरिमा का नाम दे, तुम्हारे भीतर की काँपती आवाज़ दबने नहीं, ऊपर उठने के लिए है। *** उस सोच को भी अब तोड़ डालो जो तुम्हारी कीमत रिश्तों से आँके, कोई पवित्र धागा इतना बड़ा नहीं जितनी बड़ी तुम्हारी जीवित आत्मा है। *** तुम्हारे हाथ सिर्फ़ बोझ उठाने या आँसुओं के घड़े ढोने को नहीं बने, किस्मत कहकर दुख सहते रहना तुम्हारी नियति कभी नहीं थी। *** तुम पर कोई कर्ज़ नहीं उन लोगों का जो डर के कारण वहीं ठहर गए, तुम्हारी पहली वफ़ादारी उसकी है जो लड़की अब भी भीतर जीवित है। *** खुद को आज़ाद करना लौटना है अपने ही पेड़ की हर टूटी डाल तक, और काट देना उन रस्सियों को जिनसे पीढ़ियों की औरतें बँधी रहीं। *** तुम पैदा नहीं हुई उन लोगों के लिए जो तुम्हारी रोशनी छीन लेते हैं, जो घर तुम्हें भीतर से तोड़ दे वह रहने के योग्य घर नहीं। *** अगर प्रेम काँटों का पिंजरा बन जाए तो अपनी रूह के मुरझाने से पहले निकलो, किसी स्त्री से यह...